यदिक्ष्छेत् परमांसिद्धिं संसारस्य च मोक्षणम् ।
मथुरा गीयतां नित्यां कर्मणा मनसापि च।।
- आदि वराह पुराण
जो व्यक्ति भव बन्धन से मुक्ति एवं भगवद् प्रेम रूप परमा सिद्धि की प्राप्ति की इच्छा करता है, उसे मन, वचन, कर्म से नित्य मथुरा (ब्रज) का गान करना चाहिए।
मथुरा गीयतां नित्यां कर्मणा मनसापि च।।
- आदि वराह पुराण
जो व्यक्ति भव बन्धन से मुक्ति एवं भगवद् प्रेम रूप परमा सिद्धि की प्राप्ति की इच्छा करता है, उसे मन, वचन, कर्म से नित्य मथुरा (ब्रज) का गान करना चाहिए।

