लोकवेद पथं त्यक्त्वा तवैव चरणाम्बुजम् ।
गतोस्मि शरणं राधे न मां त्वां त्यक्तुमुत्सहे ॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (59)
हे स्वामिनि [राधे] ! लौकिक एवं वैदिक मार्गों का परित्याग करके मैं केवल आपके श्रीचरण-कमलों की शरण आई हूँ !
गतोस्मि शरणं राधे न मां त्वां त्यक्तुमुत्सहे ॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (59)
हे स्वामिनि [राधे] ! लौकिक एवं वैदिक मार्गों का परित्याग करके मैं केवल आपके श्रीचरण-कमलों की शरण आई हूँ !

