मोहन मदनगुपाल को, मोहन यह ब्रज देस - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (11)

मोहन मदनगुपाल को, मोहन यह ब्रज देस - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (11)

मोहन मदनगुपाल को, मोहन यह ब्रज देस ।
अति उदार भागनि भर्यौ, राजत नंद नरेस ॥

- श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (11)

मदनगोपाल का यह मनोहर ब्रजदेश परम मंगलकारी और उदार है, जहाँ नंदनंदन श्री कृष्ण अपनी दिव्य लीला से संपूर्ण ब्रज को शोभायमान करते हुए विराजमान हैं।