ब्रह्माण्ड घाट - गोकुल महावन

ब्रह्माण्ड घाट - गोकुल महावन

यहाँ कन्हैया ने मृद भक्षण लीला की, मृद भक्षण करने के बाद ग्वाल बालों ने यशोदा से कहा, “मैया! तेरा लाला माटी खाता है" तो कान्हा बोले, "ना-ना मैया ! मैंने माटी नहीं खायी है-

मो देखति यशोदा तेरे ढोटा अबही माटी खायी ।
एहि सुनके उठके रिस धाई बाँह पकड़ लै आयी ॥
एक कर सौं भुज गाढ़ै कर एक कर लीन्है साँटी ।
मारति हौं तोहे अबहि कन्हैया बेगि न उगलो माटी ॥
"एक गोपी माता यशोदा से कहती है कि अरि यशोदा, तेरे लाला ने माटी खायी है, मैंने देखा है । इसको सुनकर माता यशोदा क्रोध से उठकर दौड़ कर श्री कृष्ण की बाँह पकड़ ली । माता ने एक हाथ से लाला की बाँह पकड़ी है और दूसरे हाथ में छड़ी ले लिया और लाला से कहा कि जल्दी से मुख से माटी उगल दे नहीं तो मैं तुझे मरूंगी ।"

नाहं भक्षितवानम्ब सर्वे मिथ्याभिशंसिनः ।
यदि सत्यगिरस्तर्हि समक्षं पश्य मे मुखम् ।
- श्रीमद्भागवत (10.8.35)
"ये सब ग्वाल-बाल झूठ बोलते हैं, मैं मिट्टी नहीं खा सकता, मैया, यदि तू मुझे झूठा समझती है तो मेरे मुख को देख ले।" 

श्यामसुन्दर बोले -
सब लरिका अब तेरे आगे झूठी कहत बनाई ।
मेरे मुख तू कह नहिं मानत दिखराऊँ बाई ।
अखिल ब्रह्माण्ड की महिमा दिखरायो मुख माहीं ।
यशोदा जी ने कहा - "ठीक है, मुख दिखा ।" श्रीकृष्ण ने मैया को मुख खोल कर दिखाया तो अखिल ब्रह्माण्ड का दर्शन यशोदा ने अपने नन्हे से शिशु के नन्हे से मुख में किया । ब्रह्माण्ड देखकर मैया महान आश्चर्य में डूब गई और ब्रह्माण्ड विहारी के ऐश्वर्य से प्रभावित होकर उन्हें भगवान् मानने लगीं ।
अब तो मैया के वात्सल्य प्रेम के भूखे यशोदानन्दन ने सोचा कि मेरी ऐश्वर्य लीला का मैया को ज्ञान होने पर माधुर्य रस से सनी मधुर लीला तो हो ही नहीं सकती । अतएव उन्होंने मैया के हृदय से अपने प्रति ऐश्वर्य भाव हटाकर पुत्र भाव उत्पन्न कर दिया ।
इस तरह यह ब्रह्माण्ड घाट की ब्रह्माण्ड दर्शन लीला है ।

स्थान :
ब्रह्माण्ड घाट नन्द भवन से 1.5 km दूर यमुना किनारे गोकुल महावन में स्थित है ।