वृन्दावनधाम को वास भलो, जहाँ पास बहै यमुना पटरानी। [1]
जो जन न्हाय के ध्यान धरें, बैकुण्ठ मिलै तिनकों रजधानी॥ [2]
चारिहू वेद बखान करें, अरु सन्त मुनीन गुनी मन मानी। [3]
यमुना यम दूतन टारत हैं, भव तारत हैं श्रीराधिका रानी॥ [4]
- ब्रज के सेवैया
वृन्दावन धाम का वास सर्वोत्तम है, जहाँ पास ही श्री यमुना पटरानी प्रवाहित होती हैं। [1]
जो भी यमुना जी में स्नान कर श्री राधा-कृष्ण का ध्यान करता है, उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। [2]
चारों वेद श्री वृन्दावन धाम का बखान करते हैं, और रसिक भक्तों ने इसका अति विस्तार से वर्णन किया है। [3]
श्री यमुना जी भक्तों के पास यमदूतों को आने नहीं देतीं, और श्री राधारानी भक्तों को भव-सागर से पार करा देती हैं। [4]
जो जन न्हाय के ध्यान धरें, बैकुण्ठ मिलै तिनकों रजधानी॥ [2]
चारिहू वेद बखान करें, अरु सन्त मुनीन गुनी मन मानी। [3]
यमुना यम दूतन टारत हैं, भव तारत हैं श्रीराधिका रानी॥ [4]
- ब्रज के सेवैया
वृन्दावन धाम का वास सर्वोत्तम है, जहाँ पास ही श्री यमुना पटरानी प्रवाहित होती हैं। [1]
जो भी यमुना जी में स्नान कर श्री राधा-कृष्ण का ध्यान करता है, उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। [2]
चारों वेद श्री वृन्दावन धाम का बखान करते हैं, और रसिक भक्तों ने इसका अति विस्तार से वर्णन किया है। [3]
श्री यमुना जी भक्तों के पास यमदूतों को आने नहीं देतीं, और श्री राधारानी भक्तों को भव-सागर से पार करा देती हैं। [4]

