(राग मारू)
श्यामा प्यारी जय जय श्रीराधा ।
करुणा सागर शील उजागर सुंदर रूप अगाधा ।। [1]
श्याम सुंदर की प्रेम पियारी प्रानन की सुख साधा ।
अली माधुरी सरण तिहारी मेटौ भव की बाधा ।। [2]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, मंगल (14)
श्यामा प्यारी श्री राधा की जय हो जो करुणा की सागर हैं, समस्त गुणों का भण्डार हैं, एवं जिनका रूप अत्यंत सुंदर एवं अगाध है । [1]
श्री राधा श्री श्यामसुन्दर की प्रेम प्यारी हैं एवं उनके प्राणों को सुख प्रदान करने वाली हैं । श्री अली माधुरी कहते हैं, "हे श्री राधा, मैं आपके चरण कमलों की शरण में हूं, कृपया कर मेरी भव बाधा को नष्ट कर दो"। [2]
श्यामा प्यारी जय जय श्रीराधा ।
करुणा सागर शील उजागर सुंदर रूप अगाधा ।। [1]
श्याम सुंदर की प्रेम पियारी प्रानन की सुख साधा ।
अली माधुरी सरण तिहारी मेटौ भव की बाधा ।। [2]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, मंगल (14)
श्यामा प्यारी श्री राधा की जय हो जो करुणा की सागर हैं, समस्त गुणों का भण्डार हैं, एवं जिनका रूप अत्यंत सुंदर एवं अगाध है । [1]
श्री राधा श्री श्यामसुन्दर की प्रेम प्यारी हैं एवं उनके प्राणों को सुख प्रदान करने वाली हैं । श्री अली माधुरी कहते हैं, "हे श्री राधा, मैं आपके चरण कमलों की शरण में हूं, कृपया कर मेरी भव बाधा को नष्ट कर दो"। [2]

