श्री वृंदावन धाम की, शोभा परम पुनीत ।
वरणी सके कवि कौन विधि, मन बुद्धि वचन अतीति ॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
श्री वृन्दावन धाम की महिमा अत्यंत पवित्र और अलौकिक है; उसका यथार्थ वर्णन कोई भी कवि पूर्णतः नहीं कर सकता, क्योंकि वह मन, बुद्धि और वाणी की सीमा से परे है।
वरणी सके कवि कौन विधि, मन बुद्धि वचन अतीति ॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
श्री वृन्दावन धाम की महिमा अत्यंत पवित्र और अलौकिक है; उसका यथार्थ वर्णन कोई भी कवि पूर्णतः नहीं कर सकता, क्योंकि वह मन, बुद्धि और वाणी की सीमा से परे है।

