शिव रमादि ब्रह्मादि के, ध्यानहिं मन ठहराई ।
सो प्यारी के प्रेम बस, सदा पलोटत पाई ।।
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री प्रेम मंजरी (6)
जो आनंदकंद श्री कृष्ण शिव, रमा और ब्रह्मा आदि देवताओं के ध्यान का विषय हैं, वही श्री राधा रानी के प्रेम से पूर्णतः अधीन होकर सदा उनके चरणों की सेवा करते रहते हैं।
सो प्यारी के प्रेम बस, सदा पलोटत पाई ।।
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री प्रेम मंजरी (6)
जो आनंदकंद श्री कृष्ण शिव, रमा और ब्रह्मा आदि देवताओं के ध्यान का विषय हैं, वही श्री राधा रानी के प्रेम से पूर्णतः अधीन होकर सदा उनके चरणों की सेवा करते रहते हैं।

