कनक रतन भूषण वसन, मिथ्या अनत विलास - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (117)

कनक रतन भूषण वसन, मिथ्या अनत विलास - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (117)

कनक रतन भूषण वसन, मिथ्या अनत विलास ।
बेटी हाट सिंगारि कैं, वसि वृंदावन व्यास ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (117)

स्वर्ण, रत्न, आभूषण और बाह्य विलास की सारी कामनाएँ त्यागकर— यदि आवश्यकता पड़े तो अपनी पुत्री को सजाकर हाट में बैठाना पड़े—तथापि श्री वृन्दावन का वास नहीं छोड़ना चाहिए; क्योंकि वही धाम जीवन का परम आश्रय है।