(राग कान्हरा एवं राग गौरी)
आज सखी बनी है अनोखी जोरी ।
कालिन्दी के कूल मनोहर, विहरत निज रुचि सों री।
फूलन के बंगला में राजैं, मोहन राधा गोरी ॥ [1]
फूल सिंगार सजे अंग अंगन, उपमा कहे कवि को री ?
'रूपमाधुरी' रूप निहारत, बंधी प्रेम की डोरी ॥ [2]
- श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (178)
हे सखी! आज जुगल किशोर श्री श्यामाश्याम की जोड़ी बड़ी सुन्दर लग रही है । दोनों अपनी रुचि अनुसार श्री वृन्दावन के मनोहर श्री यमुना तट पर विहार कर रहे हैं । वे सुन्दर फूल-बंगला में सुशोभित हैं । [1]
दोनों के अंग-अंग फूलों से श्रृंगार संपन्न हैं, जिसकी उपमा का वर्णन कौन कवी कर सकता है ? श्री रूप माधुरी प्रेम की डोरी में बंधे हैं और श्री श्यामा श्याम के रूप माधुरी को नित्य निहारते हैं । [2]
आज सखी बनी है अनोखी जोरी ।
कालिन्दी के कूल मनोहर, विहरत निज रुचि सों री।
फूलन के बंगला में राजैं, मोहन राधा गोरी ॥ [1]
फूल सिंगार सजे अंग अंगन, उपमा कहे कवि को री ?
'रूपमाधुरी' रूप निहारत, बंधी प्रेम की डोरी ॥ [2]
- श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (178)
हे सखी! आज जुगल किशोर श्री श्यामाश्याम की जोड़ी बड़ी सुन्दर लग रही है । दोनों अपनी रुचि अनुसार श्री वृन्दावन के मनोहर श्री यमुना तट पर विहार कर रहे हैं । वे सुन्दर फूल-बंगला में सुशोभित हैं । [1]
दोनों के अंग-अंग फूलों से श्रृंगार संपन्न हैं, जिसकी उपमा का वर्णन कौन कवी कर सकता है ? श्री रूप माधुरी प्रेम की डोरी में बंधे हैं और श्री श्यामा श्याम के रूप माधुरी को नित्य निहारते हैं । [2]

