धन धन वृन्दावन के माछर प्यारे ।
साधु सन्त के अङ्ग लगत हैं भजन करावन वारे ॥ [1]
जमुना तीर नीर पै बैठें गुञ्जारैं मतवारे ।
अभयराम ऐहू बड़भागी रज में रहैं विचारे ॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (73)
श्री वृन्दावन के मच्छर भी धन्य धन्य हैं, जो साधु-संत जनों के अंग से लगते हैं, एवं उनसे भजन करवाते हैं । [1]
श्री यमुना किनारे जल पर बैठकर मच्छर मतवारे से गुञ्जार करते रहते हैं । श्री अभयराम कहते हैं कि ये मच्छर भी बड़भागी हैं जो वृन्दावन की रज में पड़े रहते हैं । [2]
साधु सन्त के अङ्ग लगत हैं भजन करावन वारे ॥ [1]
जमुना तीर नीर पै बैठें गुञ्जारैं मतवारे ।
अभयराम ऐहू बड़भागी रज में रहैं विचारे ॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (73)
श्री वृन्दावन के मच्छर भी धन्य धन्य हैं, जो साधु-संत जनों के अंग से लगते हैं, एवं उनसे भजन करवाते हैं । [1]
श्री यमुना किनारे जल पर बैठकर मच्छर मतवारे से गुञ्जार करते रहते हैं । श्री अभयराम कहते हैं कि ये मच्छर भी बड़भागी हैं जो वृन्दावन की रज में पड़े रहते हैं । [2]

