यशोदा कुण्ड एवं हाऊबिलाऊ - नंदगांव

यशोदा कुण्ड एवं हाऊबिलाऊ - नंदगांव

यशोदा कुण्ड :
यशोदा कुंड का प्रणाम मंत्र :
धनधान्यसुखं देहि तीर्थराज नमोस्तु ते ।
वैकुण्ठपदलाभाय प्रार्थयामि नमस्तु ते ॥
हे तीर्थराज ! इस लोक में आप धन-धान्य सुख प्रदान करें, परलोक में वैकुण्ठ पद लाभ प्राप्त करायें । हे उभयलोकसाधक ! आपको बार बार प्रणाम है ।

यशोदा कुण्ड का नाम यशोदा जी पर इसलिए है कि यहाँ यशोदा जी प्रतिदिन स्नान करती थीं । कभी-कभी कृष्ण और बलराम को भी साथ लाती थीं तथा उन दोनों बालकों की बाल क्रीड़ा का दर्शनकर अत्यन्त आनन्दित होती थीं । कुण्डके तटपर नृसिंहजीका मन्दिर है । माँ यशोदा स्नान करनेके पश्चात् नृसिंहदेवके निकट कृष्णके कुशल क्षेमके लिए प्रार्थना करती थीं ।
यहाँ स्नान करने से धन-धान्य से परिपूर्ण होकर बैकुण्ठ पद की प्राप्ति होती है।
यशोदाकुण्डके पास ही निर्जन स्थलमें एक प्राचीन गुफा है । जहाँ अनेक सन्त महानुभावोंने साधनाकर भगवद् प्राप्ति की है । सिद्ध महात्माओंकी यह भजन स्थली आजतक निरपेक्ष साधकोंको भजनके लिए आकर्षित करती है । यशोदा कुण्ड के पास ही कारोहरो कुण्ड है ।

हाऊबिलाऊ :
हाऊ बिलाऊ का प्रणाम मंत्र :
नमः कृष्णेक्षकास्तुभ्यं धर्मकामार्थ मोक्षिणः ।
पाषाणरूपिणो देवाः यशोदाशीषसंस्थिताः ॥
कृष्ण दर्शन कराने वाले, चारों पुरुषार्थों को देने वाले, यशोदा के आशीर्वाद से स्थित हे पाषाण रूपी देवताओ! तुम्हें नमस्कार है ।

यशोदा कुण्डके पश्चिमी तटपर सखाओंके साथ कृष्णकी बालक्रीड़ा का यह स्थान है । यहाँ सखाओंके साथ कृष्ण बलदेव दोनों भाई बालक्रीड़ा करने में इतने तन्मय हो जाते थे कि उन्हें भोजन करने का भी स्मरण नहीं रहता था । मैया यशोदा कृष्ण बलराम को बुलानेके लिए रोहिणीजी को पहले भेजतीं, किन्तु जब वे बुलाने जातीं तो उनकी पकड़में ये नहीं आते, इधर-उधर भाग जाते थे । इसके पश्चात् यशोदाजी स्वयं जातीं और नाना प्रकारकी भंगिमाके द्वारा बड़ी कठिनतासे दोनोंको पकड़कर घर लातीं और उन्हें स्नान आदि कराकर भोजन करातीं । कभी-कभी यहीं पर बलराम-कृष्ण को हऊआका भय दिखाकर कृष्णको गोदीमें पकड़कर ले आतीं । उस समय कृष्ण मैयासे हऊआ दिखानेका हठ करते । मैया ! मैं हऊआ देखूँगा । आज भी हऊआकी प्रस्तरमयी मूर्तियाँ कृष्णकी इस मधुर बाललीला का स्मरण कराती हैं । 

दूर खेलन मत जाउ लाल यहाँ हाऊ आये हैं ।
हँस कर पूछत कान्ह मैया यह किनै पठाये हैं ॥

स्थान :
यशोदा कुंड नंदगाँव में नंद भवन के दक्षिण में स्थित है ।