यज्जापः सकृदेव गोकुलपतेराकर्षकस्तत्क्षणाद्यत्र प्रेमवतां समस्त पुरुषार्थेषु स्फुरेत्तुच्छता ।
यन्नामाङ्कित मन्त्र जापनपरः प्रीत्या स्वयं माधवः श्रीकृष्णोऽपि तदद्भुतं स्फुरतु मे राधेति वर्णद्वयम् ॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (94)
जिसका एक बार मात्र उच्चारण गोकुल- पति श्रीकृष्ण को तत्क्षण आकर्षित करने वाला है, जिससे प्रेमियों के लिये अर्थ, धर्मादि समस्त पुरुषार्थों में तुच्छता का स्फुरण होने लगता है, एवं जिस नाम से अङ्कित मन्त्रराज (द्वादशाक्षर मन्त्र) के जपने में माधव श्रीकृष्ण भी सदा-सर्वदा प्रीतिपूर्वक संलग्न रहते हैं । वही अत्यद्भुत दो वर्ण 'राधा' मेरे हृदय में स्फुरित हों ।
यन्नामाङ्कित मन्त्र जापनपरः प्रीत्या स्वयं माधवः श्रीकृष्णोऽपि तदद्भुतं स्फुरतु मे राधेति वर्णद्वयम् ॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (94)
जिसका एक बार मात्र उच्चारण गोकुल- पति श्रीकृष्ण को तत्क्षण आकर्षित करने वाला है, जिससे प्रेमियों के लिये अर्थ, धर्मादि समस्त पुरुषार्थों में तुच्छता का स्फुरण होने लगता है, एवं जिस नाम से अङ्कित मन्त्रराज (द्वादशाक्षर मन्त्र) के जपने में माधव श्रीकृष्ण भी सदा-सर्वदा प्रीतिपूर्वक संलग्न रहते हैं । वही अत्यद्भुत दो वर्ण 'राधा' मेरे हृदय में स्फुरित हों ।

