मथुरायां वसिष्यामि यस्यामि मथुरामहं - स्कन्द पुराण, मथुराखण्ड

मथुरायां वसिष्यामि यस्यामि मथुरामहं - स्कन्द पुराण, मथुराखण्ड

मथुरायां वसिष्यामि यस्यामि मथुरामहं ।
इति यस्य भवेद् बुद्धिः सोऽपि बन्धात् प्रमुच्यते ॥

- स्कन्द पुराण, मथुराखण्ड

मैं मथुरा (ब्रज) जाऊँगा, ब्रज वास करूँगा, ऐसी जिसकी बुद्धि होती है, वह भी बन्धन से प्रकृष्ट-मुक्त हो जाता है ।