वृंदावन की बात कछु, क़हत बने नहिं बैन - श्री माधुरी दास,  वृंदावन माधुरी (23)

वृंदावन की बात कछु, क़हत बने नहिं बैन - श्री माधुरी दास, वृंदावन माधुरी (23)

वृंदावन की बात कछु, क़हत बने नहिं बैन ।
नैंन समाने विपिन में, विपिन समाने नैंन॥

- श्री माधुरी दास, वृंदावन माधुरी (23)
 
श्री वृन्दावन की महिमा के विषय में वाणी से कुछ भी कहना संभव नहीं है; वह वर्णनातीत है। मेरे नेत्र वृन्दावन की छटा में पूरी तरह समा गए हैं और वह पावन वृन्दावन ही मेरे नेत्रों में बस गया है।