वृन्दावन तजि सुख नहीं भजि चल भजि चल वीर - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (254)

वृन्दावन तजि सुख नहीं भजि चल भजि चल वीर - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (254)

वृन्दावन तजि सुख नहीं, भजि चल भजि चल वीर ।
पैहैं मांगि मधूकरी, पीहैं जमुना नीर ॥

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (254)

हे भाई! श्री वृन्दावन धाम को छोड़ कर कहीं भी सच्चा सुख प्राप्त नहीं होता, इसलिए तू सब कुछ त्यागकर शीघ्र ही उस परम धाम की ओर भाग चल। वहाँ भूख लगने पर मधुकरी माँगकर खा लेना और प्यास लगने पर जमुना का नीर पी लेना।