मैं तो हूँ पतित आप पावन पतित नाथ,
पावन पतित हो तो पातक हरोईगे। [1]
मैं तो महादीन आप दीनबंधु दीनानाथ,
दीनबंधु हो तो दया जीयमें धरोईगे॥ [2]
मैं तो हूं गरीब आप तारक गरीबन के,
तारक गरीब हो तो विरद बरोईगे। [3]
मेरी करणीपै कछु मुकर न काज कान्ह,
करुणा निधान हो तो करुणा करोईगे॥ [4]
- ब्रज के कवित्त
हे श्यामसुंदर, मैं तो पतित हूँ, परंतु आप "पतित पावन" हैं। यदि आप सच में पतित पावन हैं, तो अवश्य ही मेरे पापों का हरण करेंगे। [1]
मैं तो महादीन हूँ, और आप "दीनबंधु एवं दीनानाथ" हैं। यदि आप दीनों के बंधु हैं, तो निश्चित ही मेरे लिए अपने हृदय में दया रखेंगे। [2]
मैं तो गरीब हूँ और आप "गरीबों के रक्षक" हैं। यदि आप सच में गरीब-निवाज़ हैं, तो अपने इस विरद को अवश्य निभाएंगे। [3]
हे कन्हैया, मेरी करनी को देखकर मुझ पर कृपा बरसाने से इनकार न करें। यदि आप वास्तव में "अकारण करुण" हैं, तो मुझ पर अपनी करुणा अवश्य बरसाएँगे। [4]
पावन पतित हो तो पातक हरोईगे। [1]
मैं तो महादीन आप दीनबंधु दीनानाथ,
दीनबंधु हो तो दया जीयमें धरोईगे॥ [2]
मैं तो हूं गरीब आप तारक गरीबन के,
तारक गरीब हो तो विरद बरोईगे। [3]
मेरी करणीपै कछु मुकर न काज कान्ह,
करुणा निधान हो तो करुणा करोईगे॥ [4]
- ब्रज के कवित्त
हे श्यामसुंदर, मैं तो पतित हूँ, परंतु आप "पतित पावन" हैं। यदि आप सच में पतित पावन हैं, तो अवश्य ही मेरे पापों का हरण करेंगे। [1]
मैं तो महादीन हूँ, और आप "दीनबंधु एवं दीनानाथ" हैं। यदि आप दीनों के बंधु हैं, तो निश्चित ही मेरे लिए अपने हृदय में दया रखेंगे। [2]
मैं तो गरीब हूँ और आप "गरीबों के रक्षक" हैं। यदि आप सच में गरीब-निवाज़ हैं, तो अपने इस विरद को अवश्य निभाएंगे। [3]
हे कन्हैया, मेरी करनी को देखकर मुझ पर कृपा बरसाने से इनकार न करें। यदि आप वास्तव में "अकारण करुण" हैं, तो मुझ पर अपनी करुणा अवश्य बरसाएँगे। [4]

