(कवित्त)
आनँद सरूप श्रीस्वामिनी सलोनी श्यामा,
आनँद सरूप श्रीस्वामिनी सलोनी श्यामा,
करुणा कटाक्ष नेक मेरी ओर कीजिये। [1]
दया की निधान प्रिया प्रियतम की जीवन प्रान,
विनती मो मान मोहिं चरण-शरन लीजिये॥ [2]
आशा बेली मेरी कर सुफल नवेली आय,
चरण सों लो लगाय दरशन नित दीजिये। [3]
वृन्दावन राजधानी मिले बास राधे रानी,
'सरस' टहल महलकर, सुख सों नित जीजिये॥ [4]
- श्री सरस माधुरीजी
हे स्वामिनी, हे आनंद स्वरूप सलोनी श्यामा, अपनी करुणा कटाक्ष मुझ पर भी कीजिए। आपके प्रेम की छाया पाकर मेरा जीवन धन्य हो जाए। [1]
हे दया की निधान, हे प्रियतम की जीवन प्राण प्रिया, मेरी विनती स्वीकार करें और मुझे अपने चरण कमलों की शरण में स्थान दें। आपकी कृपा से मेरा हृदय प्रेम से भर जाए। [2]
हे नवेली राधे, मेरे हृदय की आशाओं की बेल को सफल करें। मुझे अपने चरण-कमलों से लगाकर नित्य दर्शन का सुख प्रदान करें। [3]
श्री सरस माधुरी जी कहते हैं, "हे श्री राधा रानी, मुझे श्री वृन्दावन धाम का वास और आपके निज महल में महल टहल का अवसर दें, जिससे मैं आपकी निष्काम सेवा करके सच्चे सुख का अनुभव कर सकूँ।" [4]

