और ठौर की आगि पिय, पानी पाय बुझाय - श्री नंददास ग्रंथावली, विरह मंजरी (67)

और ठौर की आगि पिय, पानी पाय बुझाय - श्री नंददास ग्रंथावली, विरह मंजरी (67)

और ठौर की आगि पिय, पानी पाय बुझाय ।
पानी मैं की आगि बलि, काहे लागि सिराय॥

- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, विरह मंजरी (67)

हे प्रियतम! यदि किसी जगह आग लग जाती है, तो पानी वह आग बुझा देता है; परंतु यदि पानी में ही आग लग जाए, तो कहाँ जाकर बुझाया जाए? (भाव यह है कि जो श्रीकृष्ण समस्त संसार को शीतलता प्रदान करते हैं, यदि वे अपने विरह की अग्नि में इस प्रकार जलाएँगे, तो हृदय को शीतलता कौन प्रदान करेगा?)