निगम अगोचर परते पर, निज वृन्दावन धाम ।
विहरत जोरी रंग भरी, सदा 'दण्डौती राम' ॥
- श्री दण्डौतीरामजी महाराज
निज वृंदावन धाम की यह दिव्य जोड़ी (श्री राधा कृष्ण) जो नित्य विहार परायण है वह वेदों और शास्त्रों की पहुंच से भी परे है ।
श्री निज वृन्दावन वह परम धाम है जो वेदों (निगम) की बुद्धि से परे है। यहाँ यह दिव्य जोड़ी (श्री राधा-कृष्ण) सदा नित्य विहार करती है।
विहरत जोरी रंग भरी, सदा 'दण्डौती राम' ॥
- श्री दण्डौतीरामजी महाराज
निज वृंदावन धाम की यह दिव्य जोड़ी (श्री राधा कृष्ण) जो नित्य विहार परायण है वह वेदों और शास्त्रों की पहुंच से भी परे है ।
श्री निज वृन्दावन वह परम धाम है जो वेदों (निगम) की बुद्धि से परे है। यहाँ यह दिव्य जोड़ी (श्री राधा-कृष्ण) सदा नित्य विहार करती है।

