श्री स्वामी हरिदास की, सरिवर रसिक न और ।
निरखै नित्यविहार सुख, सबही के सिरमौर ॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (36)
अनन्य नृपति रसिक-शेखर ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी समस्त रसिकों के सिरमौर हैं, जिनकी समानता किसी भी रसिक से की नहीं जा सकती, क्योंकि वे समस्त रसों के मुकुटमणि रस प्रिया-प्रियतम के नित्य-विहार रस का ही अखंड रूप से अवलोकन करते हैं।
निरखै नित्यविहार सुख, सबही के सिरमौर ॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (36)
अनन्य नृपति रसिक-शेखर ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी समस्त रसिकों के सिरमौर हैं, जिनकी समानता किसी भी रसिक से की नहीं जा सकती, क्योंकि वे समस्त रसों के मुकुटमणि रस प्रिया-प्रियतम के नित्य-विहार रस का ही अखंड रूप से अवलोकन करते हैं।

