सुरत सरोवर, समर जल, उठत कटाच्छ तरंग - श्री भागवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (15)

सुरत सरोवर, समर जल, उठत कटाच्छ तरंग - श्री भागवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (15)

सुरत सरोवर, समर जल, उठत कटाच्छ तरंग ।
फूले अस्टादस कमल, अद्भुत अद्भुत रंग ॥

- श्री भागवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (15)

इस नित्य-विहार के सरोवर में विशुद्ध प्रेममयी केलि का रस भरा है। इसमें कटाक्षों की तरंगें उठ रही हैं और अद्भुत रंग के अठारह कमल खिले हुए हैं। किशोरीजी के श्री-अंगों के दस कमल (दो हस्त, दो चरण, दो नयन, दो उरोज, एक नाभि और एक मुख) और लालजी के श्री-अंगों के आठ कमल (दो हस्त, दो चरण, दो नयन, एक नाभि और एक मुख) मिलकर अठारह कमल हो गए हैं।