नारायण मैं सत्य कहुँ, भुज उठाय के आज ।
जो जिय बने गरीब तू, मिलें गरीबनिवाज ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (58)
मैं आज अपनी भुजा उठाकर प्रतिज्ञापूर्वक कहता हूँ कि यदि तुम अंतरात्मा से दीन और विनीत बन जाओ, तो दीनों के स्वामी श्री हरि तुम्हें निश्चित ही सुलभ हो जाएँगे।
जो जिय बने गरीब तू, मिलें गरीबनिवाज ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (58)
मैं आज अपनी भुजा उठाकर प्रतिज्ञापूर्वक कहता हूँ कि यदि तुम अंतरात्मा से दीन और विनीत बन जाओ, तो दीनों के स्वामी श्री हरि तुम्हें निश्चित ही सुलभ हो जाएँगे।

