(कवित्त)
अतर पुतायौ मढ्यौ महल सुगन्धन सौं,
द्वारे गज मोतिन की तोरनै तनी रहै। [1]
चन्दन महल चारु चांदनी चंदोवा लाल,
गोपमाल मनी कनी कोरनै घनी रहै॥ [2]
उमा चौर ढारै रमा आरती उतारै ठाड़ी,
रंभा रति मैनका सी कोटिन जनी रहै। [3]
हठी देवतान की दिमाकदार रानी तेऊ,
राधे महारानी जू के हाजिर बनी रहै॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (8)
निकुंज महल को इत्र से सुवासित किया गया है, द्वार पर गजमोती के तोरण लगे हुए हैं। [1]
निकुंज महल जहाँ श्री राधा विराजमान हैं, वहाँ चन्दन का लेप लगाया गया है, जहाँ चारों ओर से अद्भुत चाँदनी के प्रकाश का विस्तार हो रहा है, सखियाँ मणियों की माला लिए निकट में उपस्थित हैं। [2]
देवी उमा चंवर डुला रही हैं, लक्ष्मी जी आरती उतार रही हैं, देवलोक की अप्सराएं रंभा, रति, मेनका के समान अनंत दासियाँ विद्यमान हैं। [3]
श्री हठी जी कहते हैं कि देवताओं की प्रसिद्ध रानियां भी श्री राधा महारानी की सेवा में उपस्थित रहती हैं। [4]
अतर पुतायौ मढ्यौ महल सुगन्धन सौं,
द्वारे गज मोतिन की तोरनै तनी रहै। [1]
चन्दन महल चारु चांदनी चंदोवा लाल,
गोपमाल मनी कनी कोरनै घनी रहै॥ [2]
उमा चौर ढारै रमा आरती उतारै ठाड़ी,
रंभा रति मैनका सी कोटिन जनी रहै। [3]
हठी देवतान की दिमाकदार रानी तेऊ,
राधे महारानी जू के हाजिर बनी रहै॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (8)
निकुंज महल को इत्र से सुवासित किया गया है, द्वार पर गजमोती के तोरण लगे हुए हैं। [1]
निकुंज महल जहाँ श्री राधा विराजमान हैं, वहाँ चन्दन का लेप लगाया गया है, जहाँ चारों ओर से अद्भुत चाँदनी के प्रकाश का विस्तार हो रहा है, सखियाँ मणियों की माला लिए निकट में उपस्थित हैं। [2]
देवी उमा चंवर डुला रही हैं, लक्ष्मी जी आरती उतार रही हैं, देवलोक की अप्सराएं रंभा, रति, मेनका के समान अनंत दासियाँ विद्यमान हैं। [3]
श्री हठी जी कहते हैं कि देवताओं की प्रसिद्ध रानियां भी श्री राधा महारानी की सेवा में उपस्थित रहती हैं। [4]

