स्वान प्रसादहि छ्वै गयौ, कौआ गयौ विटारि ।
दोऊ पावन व्यासकैं, कहै भागौत विचारि ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (25)
यदि प्रसाद को कुत्ता छू ले या कौवा उसे स्पर्श कर जाए, तब भी वह अपवित्र नहीं होता। श्रीमद् भागवत और रसिक महापुरुषों का यही सिद्धांत है कि प्रसाद सदा पावन ही रहता है।
दोऊ पावन व्यासकैं, कहै भागौत विचारि ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (25)
यदि प्रसाद को कुत्ता छू ले या कौवा उसे स्पर्श कर जाए, तब भी वह अपवित्र नहीं होता। श्रीमद् भागवत और रसिक महापुरुषों का यही सिद्धांत है कि प्रसाद सदा पावन ही रहता है।

