स्वामिनी इतना तो कीजो, लाड़ली इतना तो कीजो।
जग जंजाल छुड़ाये, वास वृन्दावन कौ दीजो॥ [1]
भोर होते महलन में थारे, दर्शन को नित जाऊँ।
मंगला के नित दर्शन पाऊँ, जीवन सफल बनाऊँ॥ [2]
किशोरी मोहे सेवा में लीजो, लाड़ली सेवा में लीजो।
पड़ी रहूँ मैं द्वार तिहारे, रसिकन दर्शन पाऊँ॥ [3]
भक्तन की पग धूल मिले तो, अपने शीश चढ़ाऊँ।
किशोरी मोहे द्वारे रख लीजो, स्वामिनी द्वारे रख लीजो॥ [4]
भूख लगे तो ब्रजवासिन के टूक मांग कर खाऊँ।
कबहूँ प्रसादी श्रीमहलन की कृपा होए तो पाऊँ॥ [5]
किशोरी मेरी विनय मान लीजो, लाड़ली विनय मान लीजो।
राधे राधे रटूँ निरन्तर तेरे ही गुण गाऊँ॥ [6]
तेरे ही गुण गाये गाये मैं तेरी ही है जाऊँ।
किशोरी मोहे अपनो कर लीजो, स्वामिनी अपनो कर लीजो॥ [7]
- ब्रज के सेवैया
हे स्वामिनी जू, इतना तो कीजिये कि इस संसार की आसक्ति को छुड़ाकर श्री वृन्दावन का नित्य वास प्रदान कीजिये। [1]
सुबह होते ही नित्य महल में आपके दर्शन करने जाऊँगी, मंगला के नित्य दर्शन कर अपना जीवन सफल कर लूँगी। [2]
हे किशोरी जू, हे लाड़िली जू, मुझे अपनी सेवा में लीजिये। आपके द्वार पर मैं पड़ी रहूंगी एवं रसिकों के दर्शन पाऊँगी। [3]
यदि मुझे आपके भक्तों की चरण रज प्राप्त हो तो मैं उसे अपने माथे पर लगाऊंगी। हे किशोरी जू, हे स्वामिनी जू, मुझे अपने द्वार पर रख लीजिये। [4]
श्री वृन्दावन में यदि मुझे भूख लगेगी तो ब्रजवासियों से मधुकरी मांग कर खा लूँगी। आपकी कृपा से आपके महल की प्रसादी भी कभी-कभी प्राप्त हो जाएगी। [5]
हे किशोरी जू, हे लाड़िली जू, मेरी विनती स्वीकार कीजिये। मैं निरंतर “राधे राधे” रटूँगी एवं आपके गुणों का गान करूँगी। [6]
आपके गुणों का गान करते-करते मैं आपकी ही हो जाउंगी । हे किशोरी जू, हे स्वामिनी जू, मुझे अपनी कर लीजिये । [7]
जग जंजाल छुड़ाये, वास वृन्दावन कौ दीजो॥ [1]
भोर होते महलन में थारे, दर्शन को नित जाऊँ।
मंगला के नित दर्शन पाऊँ, जीवन सफल बनाऊँ॥ [2]
किशोरी मोहे सेवा में लीजो, लाड़ली सेवा में लीजो।
पड़ी रहूँ मैं द्वार तिहारे, रसिकन दर्शन पाऊँ॥ [3]
भक्तन की पग धूल मिले तो, अपने शीश चढ़ाऊँ।
किशोरी मोहे द्वारे रख लीजो, स्वामिनी द्वारे रख लीजो॥ [4]
भूख लगे तो ब्रजवासिन के टूक मांग कर खाऊँ।
कबहूँ प्रसादी श्रीमहलन की कृपा होए तो पाऊँ॥ [5]
किशोरी मेरी विनय मान लीजो, लाड़ली विनय मान लीजो।
राधे राधे रटूँ निरन्तर तेरे ही गुण गाऊँ॥ [6]
तेरे ही गुण गाये गाये मैं तेरी ही है जाऊँ।
किशोरी मोहे अपनो कर लीजो, स्वामिनी अपनो कर लीजो॥ [7]
- ब्रज के सेवैया
हे स्वामिनी जू, इतना तो कीजिये कि इस संसार की आसक्ति को छुड़ाकर श्री वृन्दावन का नित्य वास प्रदान कीजिये। [1]
सुबह होते ही नित्य महल में आपके दर्शन करने जाऊँगी, मंगला के नित्य दर्शन कर अपना जीवन सफल कर लूँगी। [2]
हे किशोरी जू, हे लाड़िली जू, मुझे अपनी सेवा में लीजिये। आपके द्वार पर मैं पड़ी रहूंगी एवं रसिकों के दर्शन पाऊँगी। [3]
यदि मुझे आपके भक्तों की चरण रज प्राप्त हो तो मैं उसे अपने माथे पर लगाऊंगी। हे किशोरी जू, हे स्वामिनी जू, मुझे अपने द्वार पर रख लीजिये। [4]
श्री वृन्दावन में यदि मुझे भूख लगेगी तो ब्रजवासियों से मधुकरी मांग कर खा लूँगी। आपकी कृपा से आपके महल की प्रसादी भी कभी-कभी प्राप्त हो जाएगी। [5]
हे किशोरी जू, हे लाड़िली जू, मेरी विनती स्वीकार कीजिये। मैं निरंतर “राधे राधे” रटूँगी एवं आपके गुणों का गान करूँगी। [6]
आपके गुणों का गान करते-करते मैं आपकी ही हो जाउंगी । हे किशोरी जू, हे स्वामिनी जू, मुझे अपनी कर लीजिये । [7]

