कर्म-धर्म, तप-क्षेत्र कोउ, कोऊ ज्ञान-मख ठौर ।
प्रेम-खेत श्रीविपिन बिनु, नहिं 'किशोर' गति और ॥
- श्री किशोर दास
कहीं कर्म और धर्म की साधना की भूमि है, कहीं तप और ज्ञान-यज्ञ का क्षेत्र है; परंतु श्री वृंदावन धाम तो विशुद्ध प्रेम की भूमि है, जिसके बिना श्री किशोरदास की कहीं भी वास्तविक गति नहीं है।
प्रेम-खेत श्रीविपिन बिनु, नहिं 'किशोर' गति और ॥
- श्री किशोर दास
कहीं कर्म और धर्म की साधना की भूमि है, कहीं तप और ज्ञान-यज्ञ का क्षेत्र है; परंतु श्री वृंदावन धाम तो विशुद्ध प्रेम की भूमि है, जिसके बिना श्री किशोरदास की कहीं भी वास्तविक गति नहीं है।

