काल हू को काल लोकपाल हू को पालनहारो - श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी

काल हू को काल लोकपाल हू को पालनहारो - श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी

काल हू को काल लोकपाल हू को पालनहारो,
सबकौ नियंता सदा रहत सुतंत्र है। [1]
ब्रह्मा सिव विष्णु सेष जोगी जन जतन करैं,
पावत न पार कोऊ ध्यावत उर अंत्र हैं॥ [2]
सनकादिक नारद प्रह्लाद अंबरीष आदि,
नाँचि नाँचि गावैं बजावैं ताल जंत्र हैं। [3]
विविध उपाय करैं भगवत न दीखि परै,
मोहन बस करिबे कों राधा नाम मंत्र है॥ [4]

- श्री विहारीवल्लभ, श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी

जो भगवान श्री कृष्ण काल के भी काल हैं, लोकपालों के भी पालनहार हैं, सबके नियंता हैं और स्वयं सदा स्वतंत्र हैं। [1]

जिनका ध्यान भगवान ब्रह्मा, शिव, विष्णु, शेष एवं योगीजन इत्यादि करते हैं, फिर भी उनका कोई पार नहीं पा सकते एवं वे सबसे परे हैं। [2]

जिनको प्रसन्न करने के हेतु सनकादिक, नारद, प्रह्लाद, अम्बरीष एवं अन्य भागवतगण अनेक प्रकार के वाद्य यंत्र बजाकर, नाचते-गाते हुए कीर्तन करते रहते हैं। [3]

श्री विहारीवल्लभ जी कहते हैं की "अनेक प्रकार से प्रयत्न करने पर भी जो दिखलाई नहीं पड़ते, ऐसे मनमोहन श्री कृष्ण को तत्काल वश में करने के लिए एकमात्र मन्त्र श्री राधा नाम ही है।" [4]