वारौं घनश्याम कोटि श्याम के कलेवर पै - श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (43)

वारौं घनश्याम कोटि श्याम के कलेवर पै - श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (43)

वारौं घनश्याम कोटि श्याम के कलेवर पै,
बारौं कोटि विद्युत पीतपट अमन्द पै। [1]
वंशी के प्रताप पर वारौं सुरराज चाप,
बारौं बुन्द वर्षा माल मोती सुखकन्द पै॥ [2]
ब्रज के एक कण पै बारौं कोटि तारागण,
बारौं व्योम गंगा कोटि यमुना अनन्द पै। [3]
वारों सौ कोटि नभ मण्डल रास-मण्डल पै,
वारौं शतकोटि चन्द वृन्दावन चन्द पै॥ [4]

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (43)

श्यामसुंदर के शरीर पर कोटि-कोटि घनश्याम (काले बादल) को नयौछावर किया जा सकता है। भगवान कृष्ण के पीले वस्त्रों की कान्ति पर कोटि-कोटि विद्युत रेखाएँ नयौछावर की जा सकती हैं। [1]

स्वर्ग सम्राट इंद्र के कोटि धनुष भगवान कृष्ण की बांसुरी के प्रताप पर नयौछावर किए जा सकते हैं। भगवान कृष्ण की मोतियों की माला पर लाखों वर्षा की बूंदों को नयौछावर किया जा सकता है। [2]

ब्रज के एक-एक कण पर कोटि-कोटि तारागण नयौछावर किए जा सकते हैं। यमुना के आनंद पर कोटि-कोटि आकाशगंगाओं को नयौछावर कर देना चाहिए। [3]

सौ कोटि आकाश मंडल को रास मंडल पर नयौछावर कर देना चाहिए। श्री डंडी स्वामी हरे कृष्णानन्द सरस्वती कहते हैं कि सौ करोड़ चंद्रमाओं को वृंदावनचंद पर नयौछावर कर देना चाहिए। [4]