तीनों लोकों से न्यारी राधा रानी हमारी - ब्रज के लोकगीत

तीनों लोकों से न्यारी राधा रानी हमारी - ब्रज के लोकगीत

तीनों लोकों से न्यारी राधा रानी हमारी
रानी हमारी महारानी हमारी ।
ब्रह्मा शंकर पार न पावें
ऋषि मुनि सब ध्यान लगावें
इन्द्र लगावें बुहारी, राधारानी हमारी । [1]
तीनों लोकों से न्यारी……..
नित उठ दरशन करने आवत
सुन्दर श्याम चरण दोऊ धावत
चरणों के चाकर मुरारी, राधारानी हमारी । [2]
तीनों लोकों से न्यारी……..
एक बार जो बोले राधा
जन्म जन्म की मिट जाये व्याधा
इनके चरणों पै जाऊँ बलिहारी, राधारानी हमारी । [3]

- ब्रज के लोकगीत

तीनों लोकों से न्यारी श्री राधारानी हमारी हैं, महारानी हमारी हैं ।
ब्रह्मा एवं भगवान शिव भी उनका पार नहीं पा सकते,
ऋषि मुनिगण उन्हीं के चरणों का ध्यान करते हैं,
इन्द्र वहां बुहारी लगाते हैं, ऐसी महारानी श्री राधारानी हमारी हैं । [1]

श्री कृष्ण नित्य उठकर उनका दर्शन करने आते हैं,
वे उनके चरणों की सेवा करते हैं,
श्री कृष्ण उनके चरण कमलों के चाकर हैं, ऐसी महारानी श्री राधारानी हमारी हैं । [2]

जो एक बार अपने मुख से श्री राधा नाम का उच्चारण करता है, उसकी जन्म-जन्म की बाधा मिट जाती है ।
इनके चरण कमलों पर मैं स्वयं को न्योंछावर करता हूँ, ऐसी महारानी श्री राधारानी हमारी हैं । [3]