वारी जाऊँ नागर नन्दा से मुकुट पर ।
सब देवन में कृष्ण बड़े हैं,
ज्यों तारन बिच चन्दा री ॥ [1]
सब गोपिन में राधा बड़ी हैं,
जिमि नदियन बिच गंगा री ।
चन्द्र सखी भज बालकृष्ण छबि,
मिटे दोष दुःख दुन्दा री ॥ [2]
- श्री चन्द्रसखी जी
ब्रज के मुकुटमणि नन्दनन्दन श्री कृष्ण पर मैं स्वयं को न्योंछावर करती हूँ । समस्त देवताओं में श्री कृष्ण बड़े हैं, जैसे तारों के मध्य चंद्र । [1]
समस्त गोपियों में श्री राधा बड़ी हैं, जैसे नदियों में गंगा । श्री चन्द्रसखी जी अपने गुरु श्री बाल कृष्ण का स्मरण कर कहते हैं कि दिव्य दंपती श्री राधा कृष्ण का भजन करने से समस्त दोष, दुःख एवं द्वन्द मिट जाते हैं । [2]
सब देवन में कृष्ण बड़े हैं,
ज्यों तारन बिच चन्दा री ॥ [1]
सब गोपिन में राधा बड़ी हैं,
जिमि नदियन बिच गंगा री ।
चन्द्र सखी भज बालकृष्ण छबि,
मिटे दोष दुःख दुन्दा री ॥ [2]
- श्री चन्द्रसखी जी
ब्रज के मुकुटमणि नन्दनन्दन श्री कृष्ण पर मैं स्वयं को न्योंछावर करती हूँ । समस्त देवताओं में श्री कृष्ण बड़े हैं, जैसे तारों के मध्य चंद्र । [1]
समस्त गोपियों में श्री राधा बड़ी हैं, जैसे नदियों में गंगा । श्री चन्द्रसखी जी अपने गुरु श्री बाल कृष्ण का स्मरण कर कहते हैं कि दिव्य दंपती श्री राधा कृष्ण का भजन करने से समस्त दोष, दुःख एवं द्वन्द मिट जाते हैं । [2]

