काम क्रोध में नेह सुहृदता काहू विधि कहै कोई - श्री सूरदास

काम क्रोध में नेह सुहृदता काहू विधि कहै कोई - श्री सूरदास

काम क्रोध में नेह सुहृदता, काहू विधि कहै कोई ।
धरै ध्यान हरि को जे दृढ़ करि, सूर सो हरि सो होई ॥

- श्री सूरदास

चाहे कोई काम, क्रोध, प्रेम अथवा मित्रता—किसी भी भाव या विधि से उस परमात्मा का स्मरण क्यों न करे, यदि वह दृढ़तापूर्वक श्री हरि का ध्यान धरता है, तो सूरदास जी कहते हैं कि वह भक्त अंततः श्री हरि के ही समान रूप वाला (तन्मय) हो जाता है।