रसिकन की रसना सदा, जपै युगल को नाम ।
सुरत सनी रहे रूप में, रैन दिना अठ याम ॥
- श्री रूप माधुरी, उपदेश चिंतामणि, रसिक पच्चीसी (6)
रसिकों की रसना सदैव युगल किशोर श्री राधा-कृष्ण का नाम जपती है एवं उनका हृदय आठों याम उनकी रूप-माधुरी में डूबा रहता है।
सुरत सनी रहे रूप में, रैन दिना अठ याम ॥
- श्री रूप माधुरी, उपदेश चिंतामणि, रसिक पच्चीसी (6)
रसिकों की रसना सदैव युगल किशोर श्री राधा-कृष्ण का नाम जपती है एवं उनका हृदय आठों याम उनकी रूप-माधुरी में डूबा रहता है।

