धन धन वृन्दावन में राधारानी ।
रवि शशि जाके रहैं पहरुआ
मुक्ति भरै तहाँ पानी ॥ [1]
पवन आयके झाडू देवे
इन्द्र छिरकै पानी ।
अभयराम रज वनकी महिमा
तीन लोक ने जानी ॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (3)
श्री वृन्दावन में विराजमान श्री राधारानी धन्य-धन्य हैं, स्वयं सूर्य एवं चंद्र उनके महल के पहरेदार हैं एवं मुक्ति यहां पानी भरती है । [1]
पवन आकर वहां झाड़ू लगाते हैं एवं इंद्र भूमि पर जल का छिड़काव करते हैं । श्री अभयराम कहते हैं कि श्री वृन्दावन की रज की महिमा तीनों लोक जानते हैं । [2]
रवि शशि जाके रहैं पहरुआ
मुक्ति भरै तहाँ पानी ॥ [1]
पवन आयके झाडू देवे
इन्द्र छिरकै पानी ।
अभयराम रज वनकी महिमा
तीन लोक ने जानी ॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (3)
श्री वृन्दावन में विराजमान श्री राधारानी धन्य-धन्य हैं, स्वयं सूर्य एवं चंद्र उनके महल के पहरेदार हैं एवं मुक्ति यहां पानी भरती है । [1]
पवन आकर वहां झाड़ू लगाते हैं एवं इंद्र भूमि पर जल का छिड़काव करते हैं । श्री अभयराम कहते हैं कि श्री वृन्दावन की रज की महिमा तीनों लोक जानते हैं । [2]

