चाँपति चुपरति सेज पर बिहारीदास मुख मौन - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (104)

चाँपति चुपरति सेज पर बिहारीदास मुख मौन - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (104)

चाँपति चुपरति सेज पर, बिहारीदास मुख मौन ।
ठोड़ी सों एड़ी लगी, यह सुख समुझै कौन ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (104)

श्री प्रिया प्रियतम सेज पर विराजमान हैं, जिनके चरणों को सखी प्रेमपूर्वक अभ्यंजन (दबा) कर रही है। विहार की पराकाष्ठा के रस में सब मौन हैं। श्री प्रिया जी की एड़ी सखी की ठोड़ी से लगी है। इस अति अगाध, महा अद्भुत रस को समझने वाले कौन हैं (अर्थात् विरले हैं)?