(राग सारंग)
अलकलड़ी मोहन की जोरी ।
वे रस पुंज नंद जू की जीवनि यह दुलहिन वृषभानु किसोरी ॥ [1]
वे कुंचित कच मधुप बिसेखित यह सुवेस ग्रथित सिर डोरी ।
वे अंबुज मुख यह बिधु बदनी वे कोमल कर उरज कठोरी ॥ [2]
वे गज मत्त प्रबल ब्रज नायक यह सारंग रिपु कृस कटि थोरी ।
वे ब्रन्दाबन ससि 'परमानंद' अहनिसि नागरि नैन चकोरी ॥ [3]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (800)
अलकलड़ी श्री राधा एवं मनमोहन श्री कृष्ण की जोड़ी अद्भुत शोभायमान है । रस की खान श्री कृष्ण नंद जू के दुलारे हैं एवं उनकी नित्य दुल्हन श्री राधा वृषभानु जी की दुलारी हैं । [1]
श्री कृष्ण की अलकावलि बिखरी हुई है, जिसपर भँवरे मंडरा रहे हैं एवं श्री राधा के सुन्दर केशपाश डोरी से ग्रंथित हैं । श्री कृष्ण का मुख कमल के समान है एवं श्री राधा का मुख चन्द्रमा के समान है । श्री कृष्ण के कर कमल कोमल हैं एवं श्री राधा के वक्ष स्थल कठोर हैं । [2]
श्री कृष्ण ब्रज के राजा हैं जिनकी चाल मत्त गजराज की भांति है एवं श्री राधा ब्रज की महारानी हैं जिनका कटिप्रदेश सिंह के समान है । परम आनंद स्वरूप श्री कृष्ण वृंदावन के चंद्रमा हैं एवं श्री राधा चकोर हैं जिनके नेत्र अहर्निश चन्द्रमा स्वरुप श्री कृष्ण को निहारते रहते हैं । [3]
अलकलड़ी मोहन की जोरी ।
वे रस पुंज नंद जू की जीवनि यह दुलहिन वृषभानु किसोरी ॥ [1]
वे कुंचित कच मधुप बिसेखित यह सुवेस ग्रथित सिर डोरी ।
वे अंबुज मुख यह बिधु बदनी वे कोमल कर उरज कठोरी ॥ [2]
वे गज मत्त प्रबल ब्रज नायक यह सारंग रिपु कृस कटि थोरी ।
वे ब्रन्दाबन ससि 'परमानंद' अहनिसि नागरि नैन चकोरी ॥ [3]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (800)
अलकलड़ी श्री राधा एवं मनमोहन श्री कृष्ण की जोड़ी अद्भुत शोभायमान है । रस की खान श्री कृष्ण नंद जू के दुलारे हैं एवं उनकी नित्य दुल्हन श्री राधा वृषभानु जी की दुलारी हैं । [1]
श्री कृष्ण की अलकावलि बिखरी हुई है, जिसपर भँवरे मंडरा रहे हैं एवं श्री राधा के सुन्दर केशपाश डोरी से ग्रंथित हैं । श्री कृष्ण का मुख कमल के समान है एवं श्री राधा का मुख चन्द्रमा के समान है । श्री कृष्ण के कर कमल कोमल हैं एवं श्री राधा के वक्ष स्थल कठोर हैं । [2]
श्री कृष्ण ब्रज के राजा हैं जिनकी चाल मत्त गजराज की भांति है एवं श्री राधा ब्रज की महारानी हैं जिनका कटिप्रदेश सिंह के समान है । परम आनंद स्वरूप श्री कृष्ण वृंदावन के चंद्रमा हैं एवं श्री राधा चकोर हैं जिनके नेत्र अहर्निश चन्द्रमा स्वरुप श्री कृष्ण को निहारते रहते हैं । [3]

