श्री गोविंद स्वामी समाधि स्थल, गोवर्धन

श्री गोविंद स्वामी समाधि स्थल, गोवर्धन

श्री गोविंद स्वामी (1505 - 1586), पुष्टिमार्ग के अष्ठछाप कवियों में से एक थे, जो गुसाईं श्री विट्ठलनाथ जी के शिष्य थे । इन्होने ब्रज में इसी स्थान पर निवास कर भजन किया, जो ऐरावत कुंड, जतिपुरा के पास स्थित है । श्री गोविंद स्वामी प्रतिदिन श्रीनाथजी को पद गाकर सुनाते थे । उन्हें श्रीदामा (श्री कृष्ण के सखा) का अवतार माना जाता है ।

एक बार श्रीनाथजी श्यामढाक के ऊपर बैठे वंशी बजा रहे थे। श्री गोविंद स्वामी दूर बैठे यह देख रहे थे । उसी समय, श्री गुसाईं जी स्नान कर श्रीनाथजी के उत्थापन के लिए मंदिर की ओर जाने लगे । श्रीनाथजी ने श्यामढाक से गुसाईं जी को देखा तो वे उतावलेपन में वहां से कूद पड़े, जिससे उनके वस्त्र एक वृक्ष की शाखा से फट गए और वस्त्र का एक टुकड़ा उसी शाखा पर रह गया । वह वृक्ष और उसका वस्त्र आज भी समाधि स्थल के पास स्थित है ।

श्रीनाथजी अब राजस्थान के नाथद्वारा में निवास करते हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है कि वे प्रतिदिन यहां रथ पर सवार होकर समाधि स्थान पर आते हैं एवं दिव्य लीलायें करते हैं । समाधि क्षेत्र में एक कदम्ब का वृक्ष है जिस पर एक झूला लगाया जाता है और ऐसा माना जाता है कि श्रीनाथजी स्वयं यहां झूला झूलने आते हैं ।

समाधि स्थल के पास ही श्री बनबिहारी जी का मंदिर, गोविंद कुंड और कदम्ब वन है जहां श्रीनाथजी दिव्य लीलाएं करते हैं ।

स्थान :
श्री गोविंद स्वामी की समाधि गोवर्धन के जतिपुरा में स्थित है।