जो तन रहै तो प्रिया भजैं - श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (643)

जो तन रहै तो प्रिया भजैं - श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (643)

जो तन रहै तो प्रिया भजैं, तन छूटै प्रिया संग ।
दोऊ विधि आनन्द अति, निरखैं केलि अभंग ॥

- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (643)

श्री प्रिया जी (श्री राधा) से हमारा ऐसा घनिष्ठ संबंध है कि जब तक यह तन रहेगा, तब तक हम उन्मत्त होकर निकुंज-विहारिणी श्री प्रिया जी का ही अनन्य भजन करेंगे। जब हमारा तन छूट जाएगा, तो प्रकट रूप से श्री प्रिया जी का ही संग प्राप्त होगा। दोनों प्रकार से श्री प्रिया जी हमारे हृदय को अनंत सुख प्रदान करेंगी; हमें तो बस श्री प्रिया जी की ही केलि का नित्य अवलोकन करना है।