जलमैं बसै कमोदनी, चंदा बसै अकाश ।
जो जाके मनमें बसै, सो ताके पास ॥
- श्री कबीरदास जी
कमल जल में खिलता है और चंद्रमा आकाश में रहता है। परंतु उसका प्रतिबिंब जब जल में चमकता है, तो दूरी होते हुए भी वह समीप प्रतीत होता है। ऐसे ही जो जिसके मन में बसता है, वह चाहे दूर हो, परंतु समीप ही होता है।
जो जाके मनमें बसै, सो ताके पास ॥
- श्री कबीरदास जी
कमल जल में खिलता है और चंद्रमा आकाश में रहता है। परंतु उसका प्रतिबिंब जब जल में चमकता है, तो दूरी होते हुए भी वह समीप प्रतीत होता है। ऐसे ही जो जिसके मन में बसता है, वह चाहे दूर हो, परंतु समीप ही होता है।

