प्यारे जू तिहारी प्यारी अति ही गरब भरी।
दृढ़ की हठीली ताहि आपु ही मनाइए॥ [1]
नेकहू न मानें सब भाँति ही मनाय हारी।
आपुहि चलिए ताहि बात बहराइए॥ [2]
रिस धरि बैठि रही नेकहू न खोले बैन।
ऐसी जो मानिनि तेहि काहे को रिसाइए॥ [3]
'हरीचंद' जामे माने करिए उपाय सोई।
जैसे बने तेसे ताहि पग परि लाइये॥ [4]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम मालिका (53)
हे प्यारे जू, आपकी प्राण प्यारी श्री राधा अति ही गर्व से भरी है, दृढ हठीली हैं, उन्हें आप ही मनाइये। [1]
मैंने बहुत प्रयत्न किया लेकिन वे मान नहीं रही हैं, अब आप ही चलिए एवं उन्हें मधुर वाणी से मनाइये। [2]
श्री राधा रिस में बैठी हैं, कुछ भी नहीं बोल रही हैं, ऐसी मानिनी को आप क्यों रिस दिलाते हो। [3]
श्री भारतेंदु हरिशचंद्र जी कहते हैं कि हे श्री कृष्ण, श्री राधा जिस प्रकार मानें वही उपाय कीजिये, जो भी करना पड़े, उनके चरण कमलों पर पड़कर उन्हें मना कर ही आइये। [4]
दृढ़ की हठीली ताहि आपु ही मनाइए॥ [1]
नेकहू न मानें सब भाँति ही मनाय हारी।
आपुहि चलिए ताहि बात बहराइए॥ [2]
रिस धरि बैठि रही नेकहू न खोले बैन।
ऐसी जो मानिनि तेहि काहे को रिसाइए॥ [3]
'हरीचंद' जामे माने करिए उपाय सोई।
जैसे बने तेसे ताहि पग परि लाइये॥ [4]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम मालिका (53)
हे प्यारे जू, आपकी प्राण प्यारी श्री राधा अति ही गर्व से भरी है, दृढ हठीली हैं, उन्हें आप ही मनाइये। [1]
मैंने बहुत प्रयत्न किया लेकिन वे मान नहीं रही हैं, अब आप ही चलिए एवं उन्हें मधुर वाणी से मनाइये। [2]
श्री राधा रिस में बैठी हैं, कुछ भी नहीं बोल रही हैं, ऐसी मानिनी को आप क्यों रिस दिलाते हो। [3]
श्री भारतेंदु हरिशचंद्र जी कहते हैं कि हे श्री कृष्ण, श्री राधा जिस प्रकार मानें वही उपाय कीजिये, जो भी करना पड़े, उनके चरण कमलों पर पड़कर उन्हें मना कर ही आइये। [4]

