मुंज गुंज के हार उर, मुकुट मोर पर-पुंज।
कुंज बिहारी बिहरियै, मेरेई मन-कुंज॥
- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (2)
हृदय पर गुंजाओं की माला धारण किए हुए, मस्तक पर मोर-पंखों से सुशोभित मुकुट पहने हुए कुंज-बिहारी—कुंजों में विहार करने वाले हे श्रीकृष्ण! आप मेरे मनरूपी कुंज में विहार कीजिए।
कुंज बिहारी बिहरियै, मेरेई मन-कुंज॥
- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (2)
हृदय पर गुंजाओं की माला धारण किए हुए, मस्तक पर मोर-पंखों से सुशोभित मुकुट पहने हुए कुंज-बिहारी—कुंजों में विहार करने वाले हे श्रीकृष्ण! आप मेरे मनरूपी कुंज में विहार कीजिए।

