जो मन बुद्धि दै के भजे आठु यामा।
वाकी सँभार करें शिशु जनु श्यामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (18)
जो जीव मन-बुद्धि का समर्पण कर निरन्तर श्रीराधा का स्मरण करता है उसका योगक्षेम वह उसी प्रकार वहन करती हैं जिस प्रकार नवजात शिशु की देखभाल माँ करती है।
वाकी सँभार करें शिशु जनु श्यामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (18)
जो जीव मन-बुद्धि का समर्पण कर निरन्तर श्रीराधा का स्मरण करता है उसका योगक्षेम वह उसी प्रकार वहन करती हैं जिस प्रकार नवजात शिशु की देखभाल माँ करती है।

