जो तो हौं साँचौ भजौं, श्री स्वामी हरिदास ।
तौ तुम दीजौ लाड़िली, मोहिं विपिन कौ वास ॥
- श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (2)
हे लाड़िली जू (श्री राधा)! यदि मैं सच्चे हृदय से और पूर्ण निष्ठा के साथ श्री स्वामी हरिदास जी का भजन करता हूँ, तो आप मुझ पर यह कृपा कीजिये कि मुझे अपने परम प्रिय श्री वृन्दावन धाम का नित्य वास प्रदान कर दीजिये।
तौ तुम दीजौ लाड़िली, मोहिं विपिन कौ वास ॥
- श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (2)
हे लाड़िली जू (श्री राधा)! यदि मैं सच्चे हृदय से और पूर्ण निष्ठा के साथ श्री स्वामी हरिदास जी का भजन करता हूँ, तो आप मुझ पर यह कृपा कीजिये कि मुझे अपने परम प्रिय श्री वृन्दावन धाम का नित्य वास प्रदान कर दीजिये।

