गोविन्द शरीर सत्य ताहार सेवक नित्य - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (66)

गोविन्द शरीर सत्य ताहार सेवक नित्य - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (66)

गोविन्द शरीर सत्य ताहार सेवक नित्य, वृन्दावन भूमि तेजोमय ।
त्रिभुवने शोभासार हेन स्थान नाहिं आर, याहार स्मरणे प्रेम हय ॥

- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (66)

श्रीगोविन्द का श्रीविग्रह नित्य है एवं उनके सेवक भी नित्य है। श्रीवृन्दावन भूमि अलौकिक तेजोमय है। त्रिभुवन में श्रीवृन्दावन के समान शोभा का सार स्थान और कोई नहीं है। इसका स्मरण करने मात्र से श्रीयुगल (श्री राधा कृष्ण) प्रेम आविर्भूत हो उठता है ।