अब तो यही बात मनमानी - श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (74)

अब तो यही बात मनमानी - श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (74)

अब तो यही बात मनमानी ।
छाँड़ौं नहीं श्याम श्यामा की वृन्दावन रजधानी ॥ [1]
भ्रमयो बहुत लघुधाम विलोकत छिनभंगुर दुखदानी ।
सर्वोपरी आनन्द अखण्डित सो जिय ठौर सुहानी ॥ [2]

- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (74)

अब यही बात मन को भाती है कि श्यामा श्याम की रजधानी श्री वृंदावन धाम का एक क्षण के लिए भी त्याग नहीं करना । [1]

लघु धाम इत्यादि का अवलोकन कर भटकते भटकते इस क्षण भंगुर मानव देह में अत्यंत दुःख पाया है । श्री नागरी दास जी कहते हैं कि मुझे तो केवल श्री वृंदावन धाम में ही विश्राम मिला है क्यूँकि श्री वृंदावन धाम का आनंद अखंडित एवं सर्वोपरी है जो मेरे हृदय को अत्यंत सुहाना लगता है । [2]