परम धाम परिकर जहाँ, आनंद सहज अपार ।
‘सखी छौना’ नैंनन लखै, अविचल नित्य विहार ॥
- श्री गुरु छौनाजी महाराज
जहाँ श्री श्यामा-श्याम का परम धाम श्री वृंदावन है, जहाँ उनके समस्त परिकर विराजते हैं, जहाँ सहज ही अपार रस बरसता है, वहीं मेरे नैंन भी नित्य विहार को अपलक निहारते हैं।
‘सखी छौना’ नैंनन लखै, अविचल नित्य विहार ॥
- श्री गुरु छौनाजी महाराज
जहाँ श्री श्यामा-श्याम का परम धाम श्री वृंदावन है, जहाँ उनके समस्त परिकर विराजते हैं, जहाँ सहज ही अपार रस बरसता है, वहीं मेरे नैंन भी नित्य विहार को अपलक निहारते हैं।

