वृंदावन को नाम सुनि, जिनकें हियैं हुलास - श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (32)

वृंदावन को नाम सुनि, जिनकें हियैं हुलास - श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (32)

वृंदावन को नाम सुनि, जिनकें हियैं हुलास ।
सबतैं उत्तम जानि जिहिं, रहियें तिनकैं पास ॥

- श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (32)

“श्री वृंदावन” का नाम सुनते ही जिनका हृदय प्रेम से उल्लसित हो जाता है, ऐसे महान रसिक संतों का संग करना ही सबसे उत्तम है।