(राग आसावरी, त्रिताल)
मन तू राधा-राधा भज ले ।
याहि रटत निरन्तर शुक मुनि,
शिव नारद सनकादिक अज ले ॥ [1]
औसर जात बार नहि लागे,
काल रह्यो सिर गज ले ।
नव-नागर गोपाल प्रिया के,
चरण चिह्न की रज ले ॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (83)
अरे मन! तू “राधा राधा” नाम का भावपूर्ण भजन कर क्यूँकि इसका भजन निरंतर शुकदेव, शिव, नारद, सनकादिक एवं ब्रह्मा जी भी करते हैं । [1]
ऐसा सुंदर अवसर तुझे फिर कब प्राप्त होगा, जब तक तेरे प्राण इस मानव देह में हैं, तब तक पूरी निष्ठा से भजन में लग जा । श्री हित गोपाल दास जी कहते हैं कि श्री वृंदावन धाम में आकर नवनागर श्री गोपाल प्रिया (श्री राधा) के चरणों से अंकित इस दिव्य रज को प्राप्त कर । [2]
मन तू राधा-राधा भज ले ।
याहि रटत निरन्तर शुक मुनि,
शिव नारद सनकादिक अज ले ॥ [1]
औसर जात बार नहि लागे,
काल रह्यो सिर गज ले ।
नव-नागर गोपाल प्रिया के,
चरण चिह्न की रज ले ॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (83)
अरे मन! तू “राधा राधा” नाम का भावपूर्ण भजन कर क्यूँकि इसका भजन निरंतर शुकदेव, शिव, नारद, सनकादिक एवं ब्रह्मा जी भी करते हैं । [1]
ऐसा सुंदर अवसर तुझे फिर कब प्राप्त होगा, जब तक तेरे प्राण इस मानव देह में हैं, तब तक पूरी निष्ठा से भजन में लग जा । श्री हित गोपाल दास जी कहते हैं कि श्री वृंदावन धाम में आकर नवनागर श्री गोपाल प्रिया (श्री राधा) के चरणों से अंकित इस दिव्य रज को प्राप्त कर । [2]

![मन तू राधा-राधा भज ले - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (83)](https://images.brajrasik.org/636bcbc93e33c60008703a85-m.jpeg)