(कवित्त)
बाँकेबिहारी मैं वारी बलिहारी पिय,
प्रीतम हितकारी मो ओरि को निहारिये। [1]
दरशन दो आन मोको दासी निज जान कान्ह,
करुणानिधान विरह संकट को टारिये॥ [2]
वृन्दावनवास खास महल में निवास यह,
पूरण कर आस विनय मेरी उर धारिये। [3]
कहै 'सरसमाधुरी' निहोर जोर दोऊ कर,
नंद के किशोर निज जान प्रति पारिये॥ [4]
- श्री सरस माधुरी जी
हे बाँकेबिहारी! मैं आपकी वारी जाऊँ, आप पर बलिहारी हूँ, प्रियतम। केवल आप ही मेरे हित करने वाले हो, कृपा करके मेरी ओर निहारिए। [1]
हे कान्हा! मुझे अपनी दासी मानकर, मुझ पर कृपा कीजिए और अपना दर्शन प्रदान करें। हे करुणानिधान! मुझे इस विरह संकट से उबारिए। [2]
मुझे निज महल वृंदावन में विशिष्ट वास प्रदान कर मेरे हृदय की आशा को पूर्ण कर दीजिए। [3]
श्री सरस माधुरी जी कहते हैं कि मैं दोनों हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि मुझे अपना निज जन मानकर मेरी सहायता कीजिए। [4]
बाँकेबिहारी मैं वारी बलिहारी पिय,
प्रीतम हितकारी मो ओरि को निहारिये। [1]
दरशन दो आन मोको दासी निज जान कान्ह,
करुणानिधान विरह संकट को टारिये॥ [2]
वृन्दावनवास खास महल में निवास यह,
पूरण कर आस विनय मेरी उर धारिये। [3]
कहै 'सरसमाधुरी' निहोर जोर दोऊ कर,
नंद के किशोर निज जान प्रति पारिये॥ [4]
- श्री सरस माधुरी जी
हे बाँकेबिहारी! मैं आपकी वारी जाऊँ, आप पर बलिहारी हूँ, प्रियतम। केवल आप ही मेरे हित करने वाले हो, कृपा करके मेरी ओर निहारिए। [1]
हे कान्हा! मुझे अपनी दासी मानकर, मुझ पर कृपा कीजिए और अपना दर्शन प्रदान करें। हे करुणानिधान! मुझे इस विरह संकट से उबारिए। [2]
मुझे निज महल वृंदावन में विशिष्ट वास प्रदान कर मेरे हृदय की आशा को पूर्ण कर दीजिए। [3]
श्री सरस माधुरी जी कहते हैं कि मैं दोनों हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि मुझे अपना निज जन मानकर मेरी सहायता कीजिए। [4]

