यद्यपि दोउन की लगन सब मिलि कहैं समान - श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी (105)

यद्यपि दोउन की लगन सब मिलि कहैं समान - श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी (105)

यद्यपि दोउन की लगन, सब मिलि कहैं समान ।
पै प्यारी महबूब है, आशिक प्यारो जान ॥
- श्री वल्लभ रसिक, श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी (105)

यद्यपि सभी संत और रसिक यही कहते हैं कि श्री राधा-कृष्ण दोनों का परस्पर प्रेम और लगन बिल्कुल समान है, परंतु गूढ़ रहस्य यह है कि इसमें श्री राधा प्यारी ही वास्तविक 'महबूब' (प्रेमास्पद) हैं और प्राणप्यारे श्री कृष्ण ही उनके अनन्य 'आशिक' (प्रेमी) हैं।